जल्द ही किसानों को किसानों के लिए एक ऐसा उपग्रह लॉन्च किया जाएगा जो कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की संभावना रखता है।
नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) उपग्रह को विकसित किया गया है
यह उपग्रह भारत और अमेरिका जैसे देशों के साथ दुनिया भर के किसानों के लिए अहम जानकारी प्रदान करेगा, जिससे उन्हें फसलों की वृद्धि, पौधों के स्वास्थ्य, और मिट्टी की नमी की निगरानी में मदद मिलेगी। निसार उपग्रह का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की निगरानी करना और विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी आंकड़े जुटाना है, जिनमें कृषि भी शामिल है।
निसार उपग्रह कृषि जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगा, जो खेती के विभिन्न चरणों पर नजर रखेगा। यह उपग्रह सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक का उपयोग करेगा, जो पौधों और मिट्टी की स्थिति को स्पष्ट रूप से समझने में सक्षम होगा। निसार उपग्रह से प्राप्त जानकारी का उपयोग किसानों द्वारा फसल की रोपाई से लेकर कटाई तक के सभी चरणों की निगरानी में किया जा सकेगा। यह जानकारी किसानों को यह तय करने में मदद करेगी कि फसल रोपाई का सबसे अच्छा समय कब है, सिंचाई की योजना कैसे बनानी है, और फसल कटाई का समय कब है।

निसार उपग्रह सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक पर आधारित है, जो पौधों और मिट्टी की विशेषताओं का निरीक्षण करेगा। SAR तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि यह दिन और रात दोनों में काम कर सकता है, और बादलों के माध्यम से भी सटीक जानकारी प्रदान करता है। यह उपग्रह पौधों की नमी की मात्रा और मिट्टी की नमी की स्थिति का भी पता लगाएगा। इससे किसानों को यह जानने में मदद मिलेगी कि उनकी फसलें कितनी अच्छी तरह से बढ़ रही हैं और उन्हें कितनी सिंचाई की आवश्यकता है।
निसार उपग्रह छोटे-छोटे कृषि भूखंडों की निगरानी करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ व्यापक कृषि क्षेत्रों की निरंतर कवरेज में निहित है। उपग्रह हर 12 दिनों में दो बार पृथ्वी की लगभग पूरी भूमि की तस्वीर लेगा, जिससे छोटे खेतों से लेकर बड़े कृषि क्षेत्रों तक की स्थिति का विश्लेषण किया जा सकेगा।
यह उपग्रह 10 मीटर तक के छोटे भूखंडों को कवर कर सकता है, जिससे किसान सप्ताह-दर-सप्ताह फसल के विकास में होने वाले परिवर्तनों को देख सकेंगे। इसके अलावा, इस तकनीक का उपयोग कृषि नीति निर्धारक भी कर सकते हैं, जो फसलों की व्यापक निगरानी और उनके प्रबंधन में मदद करेगा।

निसार उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग यह जानने के लिए किया जा सकता है कि किसी क्षेत्र में धान के पौधे कब लगाए गए थे और उनकी ऊंचाई और विकास के विभिन्न चरणों पर नजर रखी जा सकती है। इसके साथ ही, पौधों की नमी और खेतों की स्थिति की भी निगरानी की जा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में धान की फसल की नमी कम हो रही है, तो इसका मतलब हो सकता है कि सिंचाई की आवश्यकता है, और इस जानकारी का उपयोग किसान अपनी सिंचाई योजनाओं में समायोजन के लिए कर सकते हैं।
उच्च-रिज़ॉल्यूशन और व्यापक कवरेज
निसार उपग्रह कृषि भूमि का उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करेगा, जिससे यह ज्ञात हो सकेगा कि कौन सी फसलें कितनी अच्छी तरह से बढ़ रही हैं। इसका उपयोग कृषि उत्पादकता के पूर्वानुमानों को सटीक बनाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, भारत सरकार या किसी भी अन्य सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि वह फसल उत्पादन और क्षेत्रफल के सटीक आंकड़े प्राप्त कर सके। निसार उपग्रह के नियमित और विस्तृत डेटा के साथ यह संभव हो पाएगा।
मिट्टी की नमी और पौधों की नमी पर नजर
निसार उपग्रह न केवल फसलों की वृद्धि पर नजर रखेगा, बल्कि यह मिट्टी की नमी और पौधों की नमी की स्थिति का भी अनुमान लगाएगा। गीली मिट्टी अधिक संकेत लौटाती है, जबकि सूखी मिट्टी कम संकेत लौटाती है। इसी प्रकार, पौधों की नमी की स्थिति का भी अनुमान लगाया जा सकता है। इस जानकारी से किसानों को यह जानने में मदद मिलेगी कि उनकी फसलें पानी की कमी से जूझ रही हैं या नहीं, और यह तय करने में मदद मिलेगी कि उन्हें कितनी सिंचाई की आवश्यकता है।
खाद्य सुरक्षा और संसाधन प्रबंधन
निसार उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग खाद्य सुरक्षा के मामलों में भी किया जा सकेगा। इसके आंकड़े संसाधन प्रबंधकों को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य देंगे, जिससे वे अपने क्षेत्र की कृषि स्थिति का समग्र अवलोकन कर सकेंगे। यह जानकारी खाद्य सुरक्षा और संसाधनों के अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, मिट्टी की नमी के आंकड़े जल प्रबंधकों को यह समझने में मदद करेंगे कि फसलें सूखे या बाढ़ जैसी स्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, और यह जानकारी सिंचाई योजनाओं को प्रभावी बनाने में मददगार होगी।